takhat pe soye gayo languriya(तखत पर सोए गयो लांगुरिया)

कर के मंदिर के पट बंद, तखत पर सोए गयो लांगुरिया…..


गणपत ढूंढे भैरव ढूंढे, पंडा और पुजारी देवी के दर्शन को भैया,भीड़ लग गई भारी हो गए देवी देवता तंग, तखत पर सोए …


धरती में ढूंढे, गगन में ढूंढे और ढूंढे पाताल चारों दिशा में दूत बैठाए,खोज करो तत्काल लेकर पोथी पन्ना संग, तखत पर सोए…..


दूर दूर के आए यात्री, भीड़ लग गई भारी देवी के दर्शन को भैया,तरसे नर और नारी.पिला कर भोला जी को भंग, तखत पर सोए…


कबहु ना सोयो ऐसो लंगूर, अब ही कैसे सोयो ऐसी नींद में सोयो लांगुर,मैया को ध्यान भी खोयो होकर मस्त मलंग पलंक, तखत पर सोए …

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