यही है विधि का बिधान पिता घर बेटी
राखी ना जाये
पाल पोस कर बड़ी बनाई
भेज दई ससुराल पिता घर बेटी राखी न जाए।
राजा हिमाचल में गौरा पाली,भेज दई कैलाश, पिता घर बेटी ना राखी जाए,
राजा जनक ने सीता पाली, स्वयंबर दिया रचाए, पिता घर बेटी ना राखी जाए
मात कहे बेटी आती जाती रहीयो.बाबुल कहे छठ मास, पिता पे बेटी ना राखी जाए।
बिरन कहे बहना सावन सूने
भावज कहे क्या काम, पिता पे बेटी ना राखी जाए।
बेटी है किसी और का गहना
जग में पुरानी रीति, पिता पे बेटी ना राखी जाए।

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